୧ ଜାନୁଆରୀ ୨୦୨୧ରେ ଗଣମାଧ୍ୟମରେ ପ୍ରକାଶିତ ଖବର
VISWA
SAMBAD KENDRA,ODISHA
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ସଂଗଠନ
ଶ୍ରୀରାମ ଜନ୍ମଭୂମି ନିଧି ସମର୍ପଣ ଅଭିଯାନରେ ସାମିଲ ହୁଅନ୍ତୁ
http://www.theprajatantra.org/prajatantra/epaper/edition/1769/the-prajatantra-no1-newspaper-in-odisha/page/8
ଫ୍ରି ହ୍ରାସ ସହ ଶିକ୍ଷାନୁଷ୍ଠାନ ଖୋଲିବାକୁ ଦାବି
https://sakalaepaper.com/view/235/bhubaneswar/11
ଶ୍ରୀରାମ ଜନ୍ମଭୂମି ନିଧି ସମର୍ପଣ ଅଭିଯାନ ବୈଠକ
https://www.sambadepaper.com/imageview_211742_1585835_4_96_01-01-2021_5_i_1_sf.html
ନିଧି ସଂଗ୍ରହ ମାଧ୍ୟମରେ ରାମ ମନ୍ଦିର ନିର୍ମାଣ କାର୍ଯ୍ୟରେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ବ୍ୟକ୍ତିଙ୍କୁ ଯୋଡ଼ିବା ଆମର ଲକ୍ଷ୍ୟ : ବିଶ୍ୱହିନ୍ଦୁ ପରିଷଦ
https://vskodisha.com/vhp-
ଶୁଳ୍କ ହ୍ରାସ ସହ ଶିକ୍ଷାନୁଷ୍ଠାନ ଗୁଡିକୁ ପ୍ରତ୍ୟକ୍ଷ ଖୋଲିବା ପାଇଁ ପଦକ୍ଷେପ ନିଅନ୍ତୁ ରାଜ୍ୟ ସରକାର- ଶ୍ରୀ ସପ୍ତର୍ଷୀ ସରକାର
https://vskodisha.com/abvp-
ମନ୍ଦିର
ପାକିସ୍ତାନରେ ହିନ୍ଦୁ ମନ୍ଦିର ଧ୍ୱଂସ,୩୦ ଗିରଫ
https://odishanewsnitidin.com/index.php?ID=20&PubId=4&schedule=2021-01-01&PageId=84742&PageNum=2
https://www.sambadepaper.com/imageview_212195_0659220_4_75_01-01-2021_12_i_1_sf.html
https://samajaepaper.in/imageview_35_11202131727613_4_71_01-01-2021_16_i_1_sf.html
ଗୋ ମାତା
ପଶ୍ଚିମବଙ୍ଗରେ ଗୋଚାଲାଣ ର୍ୟାକେଟ
http://epaper.prameyanews.com/m/444520/5fee40875893a
ପରାବର୍ତନ
ମୂଳ ଧର୍ମକୁ ଫେରିଲେ ଆଦିବାସୀ
http://epaper.prameyanews.com/edition/8665/kendujhar/page/15
ଧର୍ମାନ୍ତରୀକରଣ
UN
के ईसाई कर्मचारियों को कांगो में मुसलमान बना रहा पाकिस्तानी कर्नल, जाँच के आदेश
ଆତଙ୍କବାଦୀ
କାଶ୍ମୀର ଘାଟିରେ ୨୨୫ ଆତଙ୍କବାଦୀ ମରିଛନ୍ତି
https://odishanewsnitidin.com/index.php?ID=20&PubId=4&schedule=2021-01-01&PageId=84742&PageNum=2
आतंक फैलाने के लिए विदेश से फंड भिजवाकर पंजाब में करवाई कई हत्याएं, साजिश में शामिल दो गिरफ्तार
A. करनाल से पकड़े गए दोनों आरोपी रिमांड के बाद भेजे जेल, SP ने कहा-हिसार पुलिस कर रही है जांच
B. अमृतसर के सुधीर सूरी और लुधियाना के गुरशरण समेत कई लोगों की हत्या करवाने का आरोप
C. सूचना के बाद बीती 23 दिसंबर को STF ने फिल्डिंग लगाई और दोनों आरोपियों को करनाल CHD सिटी से पकड़ लिया
ଦେଶ ବିଦେଶ
ଉତରପ୍ରଦେଶରେ ପାକିସ୍ତାନୀ ମହିଳା ହେଉଛନ୍ତି ଗାଁ ମୁଖିଆ
https://www.sambadepaper.com/imageview_212195_0659220_4_75_01-01-2021_12_i_1_sf.html
ASI
गुल मोहम्मद के कमरे में फंदे से लटके मिले 2 हिंदू, हत्या से पहले तड़पाया भी गया: पाकिस्तान के सिंध की घटना
लुधियाना - हलवारा एयरबेस पर हमले की साजिश नाकाम, तीन आतंकी गिरफ्तार
पंजाब पुलिस ने हलवारा एयरबेस (लुधियाना) पर पठानकोट एयरफोर्स स्टेउशन की तरह आतंकी हमले की साजिश को नाकाम कर दिया और तीन आतंकियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है. तीनों आतंकियों का संबंध खालिस्तान समर्थक अलगाववादी संगठनों से है. हालांकि, अभी आतंकी संगठनों के नाम की जानकारी नहीं मिली है. गिरफ्तार आतंकियों में लुधियाना के टूसे (टूसा) गांव के रामपाल सिंह व सुखकिरण सिंह सुक्खा, जबकि हिमाचल प्रदेश का साबिर अली बताए जा रहे हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रामपाल सिंह एयरबेस की खुफिया जानकारी व फोटो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ के एजेंट अदनान को भेजता था. डीएसपी गुरबंस ¨सिंह ने बताया कि उन्होंने एक गुप्त सूचना के आधार पर गांव रत्तोवाल में चेकिंग के दौरान रामपाल को काबू किया.
अल्पसंख्यक और अलग-थलग..!!
पुरानी आदतें जड़ जमा चुके बुरे नशे की तरह होती हैं, मुश्किल से ही छूटती हैं. अव्वल तो प्राण छूट जाएं आदतें नहीं छूटतीं. पत्रकार शेखर गुप्ता की एक टिप्पणी मुझे ऐसी ही आदतों की याद दिला रही है. दैनिक भास्कर में छपने वाले अपने कॉलम में उन्होंने 29 दिसंबर को लिखा – “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे भारतीय मुसलमान अल्पसंख्यकों’ की ओर पहली बार हाथ बढ़ाया है.” अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की वर्षगांठ के अवसर पर प्रधानमंत्री के भाषण को सुनकर शेखर गुप्ता को मुस्लिमों के बारे में ‘भाजपा से अलग’ मोदी का रवैया दिखाई दिया है. मुसलमानों के संदर्भ में गहरी चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने ‘नाराज, हताश और उपेक्षित’ शब्दों के प्रयोग किए हैं.
यह बेहद गंभीर है कि भारत में कोई समुदाय अपने आपको किसी भी राज्य में अलग-थलग, नाराज, हताश और उपेक्षित महसूस करे. किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र का लक्षण यह नहीं है.
https://vskbharat.com/minority-and-isolated/
विज्ञान और प्रकृति से कोसों दूर, ग्रेगरियन कैलेंडर (ईस्वी सन्)
अंतरराष्ट्रीय मस्ती में अपने भारत के गौरवशाली अतीत और सांस्कृतिक धरोहर को न भूलें. इस नववर्ष की पृष्ठभूमि को समझना आज के संदर्भ में जरूरी है.
इस समय विश्व में 70 से अधिक कालगणनाएं प्रचलित हैं, उनसे सम्बन्धित देशों में उनके नववर्ष अपनी-अपनी परम्पराओं के अनुसार आते हैं और अपने-अपने देश के सांस्कृतिक और धार्मिक रीति-रिवाजों और मान्यताओं के अनुसार मनाए जाते हैं.
परन्तु इन सभी कालगणनाओं का आधार सारे ब्रह्मांड को व्याप्त करने वाला कालतत्व न होकर व्यक्ति विशेष, घटना विशेष, वर्ग विशेष, सम्प्रदाय विशेष अथवा देश विशेष है.
ईस्वी सन् का प्रारम्भ ईसा की मृत्यु पर आधारित है. परन्तु उनका जन्म और मृत्यु अभी भी अज्ञात है. ईस्वी सन् का मूल रोमन सम्वत् है. यह 753 ईसा पूर्व रोमन साम्राज्य के समय शुरु किया गया था.
उस समय उस सम्वत में 304 दिन और 10 मास होते थे. जनवरी और फरवरी के मास नहीं थे. ईसा पूर्व 56 वर्ष में रोमन सम्राट जूलियस सीजर ने वर्ष 455 दिन का माना. बाद में इसे 365 दिन का कर दिया गया.
https://vskbharat.com/far-from-science-and-nature-gregorian-calendar-ad/

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